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Pune, Maharashtra - INDIA
Article   | अनुवाद और अनुवादक

किसी लेखक का मूल कार्य अन्य लोग भी चाव से पढ़ सकें इस भावना से अनुवादक कई पुस्तकों के अनुवाद करता है | लेकिन अनुवादक को ध्यान रखना पड़ता है कि लेखक की जो भावनाएँ वह व्यक्त करना चाहता है, उनके साथ खिलवाड़ न करें | अन्यथा “दिल दुःख से भरा है’ इसका अनुवाद करते समय अगर “ दिल गडम-गडम हो रहा है” लिखा गया तो वह हास्यास्पद रूप ले लेगा | या “ प्रात:काल की उज्ज्वलता” लिखने के बदले “ प्रात: की लालिमा” लिखें, तो नजरों के सामने सूर्योदय का विहंगम दृश्य आ जाएगा |



कई लोगों को पुस्तकें बडे चाव से पढने का शौक होता है | अपनी भाषा की पुस्तकें तो सब पढ़ते हैं, लेकिन अन्य भाषाओं की पुस्तकें पढने की भी उनको इच्छा होती है | परन्तु वह भाषा न आने के कारण उनको मन मारकर रहना पड़ता है | उनकी सुविधा के लिए संसारभर की बढ़िया से बढ़िया पुस्तकें उनतक पहुँचाने का काम हम जैसे शौक़ीन अनुवादक करते हैं | परन्तु यह किसी ऐरे-गैरे नत्थु खैरे का का काम नहीं है यह काम या अनुवाद शुरू करने के अनुभव के बाद आता है |


मैं हिंदी-मराठी की शिक्षिका थी | कार्यकाल समाप्त होने के बाद जब पहली बार अनुवाद करना शुरू किया तब कई मजेदार बातें होतीं थीं | उदा. के तौर पर अनुवाद के समय दोनों ही भाषा के शब्द मन में आते थे और फिर “बंदर उड्या मार रहा है”; “काला उंदीर दौड़ रहा है”; ‘यह भात का ढेकूळ है, जिसे वरण में कालव-कालव के खाते हैं” ऐसा उपयोग तो मैंने नहीं किया यह ध्यान रखना पड़ता था |


अनुवाद करते समय अनुवादक का भाषा पर प्रभुत्व होना बहुत जरूरी होता है | आज हम जो “पॅनेशिया” के माध्यम से अनुवाद कार्य कर रहे हैं वह “ एक तितली, अनेक तितलियाँ” की तरह ‘एक भाषा, अनेक अनुवाद” की तरह चल रहा है | इसका मजा आ रहा है साथ ही यह संतोष की भावना है कि किसी लेखक की भावनाएं, उसके विचार सभी पाठकों तक पहुंच रहे हैं |


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